प्रकाश क्या है ? ( What is light ? ) what is light explain


प्रकाश क्या है ? ( What is light ? ) 

प्रकाश(Light) से हम सभी परिचित हैं । प्रकाश(Light) की सहायता से हम वस्तुओं को देख सकते हैं । अंधेरे कमरे में अपनी आँखों को खुली रखने पर भी हमें कुछ दिखलायी नहीं देता है । स्पष्ट है कि वस्तुओं को देखने के लिए , आँखों के अतिरिक्त कुछ और भी आवश्यक है जिसे हम प्रकाश कहते हैं । प्रकाश को हम देख नहीं सकते लेकिन इसका अनुभव कर सकते हैं । अत : हम कह सकते हैं कि ” प्रकाश वह भौतिक साधन अथवा कारण है जिसके द्वारा हम वस्तुओं को देख सकते हैं ।
” अर्थात् “ प्रकाश (Light) एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमारे दुष्टि ज्ञान को जागृत करता है । ” प्रकाशीय ऊर्जा को अन्य ऊर्जाओं में रूपान्तरित किया जा सकता है तथा अन्य ऊर्जाओं से इसे प्राप्त भी किया जा सकता है । जैसे जब लुहार हथौड़े से लोहे के टुकड़े के ऊपर चोटें मारता है तो चिंगारी निकलती है । यहाँ यान्त्रिक ऊर्जा का रूपान्तरण प्रकाश ऊर्जा और कामीय ऊर्जा के रूप में होता है । प्रकाश निर्वात् ( Vacuum ) में भी चल सकता है । निर्वात् में प्रकाश का वेग 3×102 मीटर.सेकण्ड2 होता है ।

प्रकशिक माध्यम ( Optical Medium )

प्रकाश (Light) , जिस पदार्थ से होकर गमन करता है , उसे प्रकाशिक माध्यम कहते हैं । मुक्त आकाश ( free space ) [ जिसे सामान्यतः निर्वात् ( vacuum ) कहते हैं । ] भी प्रकाशिक माध्यम है । माध्यमों से होकर प्रकाश की गमन – क्षमता के आधार पर उन्हें तीन वर्गों में बांटा जाता है :

 1. पारदर्शक ( Transparent )   जिस माध्यम से होकर प्रकाश का अधिकांश भाग आर – पार निकल जाता है , उसे पारदर्शक माध्यम कहते हैं । उदाहरणतः वायु , जल , काँच आदि । निर्वात् ( vacuum ) आदर्श अथवा पूर्णत : पारदर्शक माध्यम है क्योंकि इसमें होकर प्रकाश का 100 % भाग आर – पार निकल जाता है ।
 
 2. पारभासक ( Transluscent ) – जिस माध्यम से होकर प्रकाश (Light) का केवल आंशिक भाग ही आर – पार गमन करता है , उसे पारभासक माध्यम कहते हैं । उदाहरणतः घिसा हुआ काँच , तेल लगा हुआ कागज , गंदला जल आदि ।
 3. अपारदर्शक ( Opaque ) – जिस पदार्थ से होकर प्रकाश आर – पार नहीं जा सकता उसे अपारदर्शक कहते हैं । किसी अपारदर्शक पदार्थ के तल पर आपतित प्रकाश , उससे पूर्णतः परावर्तित अथवा अवशोषित हो जाता है ।

प्रकाश के लक्षण ( Properties of Light )

1. प्रकाश(Light) विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के रूप में चलता है ।
 
 2. निर्वात् में प्रकाश की चाल 3 x 108 मीटर.सेकंड-1 है ।
 
 
4. ठोस तथा द्रव माध्यमों के तलों से प्रकाश का परावर्तन हो जाता है ।
 
5. यदि प्रकाश(Light) एक पारदर्शक माध्यम से दूसरे पारदर्शक माध्यम में जाता है तो उसका अपवर्तन हो जाता है ।
6. दृश्य प्रकाश का तरंग दैर्घ्य 3900Aसे 7800A तक होता है ।
 
7.प्रकाश , तरंगों के लाक्षणिक गुण – व्यतिकरण ( Interference ) , विवर्तन ( Diffraction ) तथा ध्रुवण ( polarisation ) प्रदर्शित करता है ।
 
 
 

प्रकाश की किरण ( Ray of Light )

प्रकाश की किरण ( Ray of Light )

 ( Ray of Light )

 किसी समांग माध्यम में एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक प्रकाश जिस ऋजु रेखीय मार्ग से होकर जाता है उसे प्रकाश की किरण कहते हैं । एक ही दिशा में जाने वाले प्रकाश की किरणों के समूह को प्रकाश पुँज ( Bearn of light ) कहते हैं । प्रकाश पुँज तीन प्रकार के होते हैं
( 1 ) अभिसारी  ( Convergent ) – यदि सभी प्रकाश की किरणें एक ही बिन्दु पर मिल रही हों तो उसे अभिसारी प्रकाश पुँज  (Light beam ) कहते हैं ।
( ii ) अपसारी ( Divergent ) – यदि प्रकाश की किरणें किसी एक बिन्दु से आती हुई प्रतीत हो रही हों तो इसे अपसारी प्रकाश पुँज (Convergent light beam)  कहते हैं ।
 ( iii ) समान्तर ( Parallel ) – यदि प्रकाश की किरणें परस्पर समान्तर हों तो इसे समान्तर प्रकाश पुँज कहते हैं ।

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