india:s first super computer param 8000 story

india:s first super computer param 8000 story 


वर्ष 1984, जब राजीव गांधी अपनी मां की हत्या के बाद देश के प्रधान मंत्री बने, उनका सबसे महत्वपूर्ण प्रयास देश को उच्च तकनीक बनाने का था, वे भारत की तकनीक को उच्चतम तकनीक तक ले जाना चाहते थे, जो बिना संभव नहीं था। Super computer

उस समय, super computer के दुनिया में केवल दो से चार देश थे। राजीव गांधी अपने सपने को साकार करने के लिए अमेरिका गए, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन के सामने अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने भारत को एक  super computer और  क्रायोजेनिकइंजन देने की बात की, जिसका उपयोग अंतरिक्ष में किया जाता है। वहां रोनाल्ड रेगन ने जवाब दिया कि हम इसके बारे में सोचेंगे। ऐसी ही एक उम्मीद के साथ राजीव गांधी भारत लौटे


 और फिर कुछ महीनों के बाद, अमेरिका ने कोई दिलचस्पी नहीं ली, फिर राजीव गांधी बस अमेरिका की यात्रा पर गए, जहां उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति को फिर से super computer के बारे में याद दिलाया, फिर संयुक्त राज्य ने भारत को यह तकनीक देने से इनकार कर दिया। दिया। जिसके बाद राजीव गांधी फिर से भारत लौट आए।

 राजीव गांधी ने रूस के साथ भी यही कोशिश की थी, लेकिन रूस भी पीछे हट गया और यह तकनीक भारत में नहीं आ सकी। अब एक भारतीय संगठन CSIR ने भारत सरकार को आश्वासन दिया कि हम भारत में ही super computer बनायेंगे।

उन्होंने कहा कि हम भारतीय वैज्ञानिक भी super computer बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत सरकार हमें सभी संसाधन उपलब्ध कराती है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी एक super computer होगा, और भारत सरकार की अनुमति के साथ, CSIR के भागीदार CDAC ने दिन-रात काम किया और भारत का पहला super computer बनाया ,

 भारत में पूरी तरह से निर्माण किया गया था जो परम 8000 बनाया गया था। जिसका हर एक हिस्सा भारत के वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया था। भारत की इस उपलब्धि ने दुनिया के कई देशों को चौंका दिया था, आज भारत ने परम 10000, परम युवा 1, परम युवा 2 जैसे कई super computer बनाए हैं और DRDO के वैज्ञानिक क्रायोजेनिक इंजन बनाने में सफल रहा है। इसी तरह, अन्य देशों ने उपग्रह की तकनीक नहीं दी है,

भारत ने अपना खुद का उपग्रह बनाया है। और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आज भारत उपग्रहों को बनाने और छोड़ने के मामले में इतना आगे बढ़ चुका है कि आज 24 देशों के 209 उपग्रह अंदरूनी इलाकों में भेजे जा चुके हैं। जिनमें से केवल 3 उपग्रह भारत के थे और शेष अन्य देशों के थे।

मित्र, अगर आपको भारतीय होने पर गर्व है, तो इस लेख को साझा करना न भूलें।

पढ़ने के लिए धन्यवाद। ….

Article in English-In the year 1984, when Rajiv Gandhi became the Prime Minister of the country after the assassination of his mother, his most important effort was to make the country high-tech, he wanted to bring India’s technology to the highest technology which was not possible without it. Super computer


At that time, there were only two to four countries in the world of supercomputers. Rajiv Gandhi went to America to realize his dream, he spoke in front of US President Ronald Regan, in which he talked about giving India a super computer and cryogenic engine, which is used in space. There Ronald Regan replied that we would think about it. Rajiv Gandhi returned to India with one such hope





 And then after a few months, the US did not take any interest, then Rajiv Gandhi just went on a trip to America, where he reminded the President of America about the supercomputer again, then the United States gave this technology to India. Refused. Gave. After which Rajiv Gandhi returned to India again.



 Rajiv Gandhi had tried the same with Russia, but Russia also backed down and this technology could not come to India. Now an Indian organization CSIR assured the Government of India that we will make super computer in India itself.



He said that we Indian scientists can also make super computers. He said that if the Government of India provides all the resources to us, the day is not far when India will also have a super computer, and with the permission of the Government of India, CSIR partner CDAC worked day and night and India’s first super computer,



 The ultimate 8000 was built entirely in India. Every part of which was created by the scientists of India. This achievement of India had shocked many countries of the world, today India has built many super computers like Param 10000, Param Yuva 1, Param Yuva 2 and has succeeded in creating DRDO’s scientific cryogenic engine. Similarly, other countries have not provided satellite technology,



India has made its own satellite. And you will be surprised to know that today India has advanced so much in the matter of making and dropping satellites that today 209 satellites of 24 countries have been sent to the interior areas. Of which only 3 satellites were from India and the rest were from other countries.



Friend, if you are proud of being an Indian, don’t forget to share this article.



Thank you for reading. ….

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